जीवन-दर्शन
[आकार-२३x३६/१६, पृष्ठ-४१२, मूल्य-२०० रूपये]
महाकवि डॉ० वेदप्रकाश आर्य ने वेद, उपनिषद्, दर्शन, रामायण, महाभारत, मनुस्मृति, चाणक्यनीति और महर्षि दयानन्द के ग्रन्थों का स्वाध्याय एवं अनुसन्धान करके मानवोपयोगी प्रायः सभी विषयों को देवनागरी भाषा (हिन्दी) के काव्यरूप् में विस्तारपूर्वक लिखा है। पुस्तक की भाषा अत्यन्त सरल, शुद्ध, रोचक, प्रभावपूर्ण और संगीतात्मक है। हम विश्वासपूर्वक कहते हैं कि ‘जीवन-दर्शन’ विश्व-सहित्य का अनुपम एवं अदभुत ग्रन्थ-रत्न है। संसार में ऐसा काव्य-ग्रन्थ प्रथम वार लिखा गया है। ‘जीवन-दर्शन’ पुस्तक डॉ० वेदप्रकाश आर्य के आठ वर्षों की तपस्या का फल है, जिसे पढ़ते ही आप आनन्द-विभोर हो जाएगे। ‘जीवन-दर्शन’ की साजसज्जा एवं मुद्रण अत्यन्त सुन्दर हैं तथा गत्ते की पक्की जिल्द है।